25 दिसंबर 2016

बुद्ध धर्म के बारे में एकत्रित और खोजी गयी अद्भुत जानकारियां

 बुद्ध , बौद्ध धर्म, और भगवन बुद्ध

(लेखन का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को आहत करना बिलकुल भी नही है , यह सिर्फ जनश्रुतियों और जातक कथाओं को समझने का प्रयत्न भर है )
लोगो को सत्य अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले गौतम बुद्ध को मानने वाले भारत समेत दुनिया में करोड़ो लोग हैं,
परंतु आज एक नयी बात आपको बताते है कि भगवान बुद्ध जो विष्णु के 9 वें अवतार माने जाते है और गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) दो अलग व्यक्ति है,,
देखे कैसे-
जातक कथाओं के अनुसार अब तक गौतम बुद्ध से पूर्व 24 बुद्ध हो चुके है
जिनमे कुछ ज्ञात है
जैसे
18 वें फुस्स बुद्ध-
पिता-जयसेन, पत्नी- किसगोत्मा, 58 हाथ लंबे तथा 90 हज़ार वर्ष की अवस्था में सेताराम में परिनिर्वाण
19वें विपस्सी  बुद्ध -
पिता- बंधुम, माता -बंधुमति
पत्नी-सुतना, पुत्र-सामवत्त संघ
80 हज़ार वर्ष की अवस्था में परिनिर्वाण
20 वें शिखि बुद्ध -
पिता -अरुणाव , माता- पभवति
जन्म -अरुणावती में , पत्नी- सब्बकामा, पुत्र-अतुल
70 हज़ार वर्ष के पश्चात दस्सराम में परिनिर्वाण
21वें वेसम्भू बुद्ध-
पिता- सुप्पतित्त , माता-यसवती
पत्नी - सुचित्रा, पुत्र- सुप्पबुद्ध
60 हज़ार वर्ष के पश्चात परिनिर्वाण
22 वे कुकसंध बुद्ध
पिता-अग्गिदत्त खेमावति
माता- विशाखा
खेमावन में जन्म
पत्नी- विरोचमना
पुत्र- उत्तर
23 वें कोनागमन बुद्ध
इनके छूप का वर्णन ह्वेनसांग तथा फाह्यान ने भी किया है ,
सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 20 वे वर्ष में कोनागमंन के जन्मस्थान पर बने छूप को दोगुना बढ़ किया था ,
24 कश्यप बुद्ध 
इनका जन्म सारनाथ में हुआ था
इनके तीर्थो का वर्णन भी ह्वेनसंग ने किया है,
और अब आते है शाक्यमुनि अर्थात
25 वे  बुद्ध- गौतम बुद्ध
बचपन का नाम -सिद्धार्थ
पिता-सुद्धोधन
माता-महमाया
जन्म 563 बी.सी. कपिलवस्तु लुम्बिनी के जंगलों में
पिता सुद्धोधन साक्यकुल के प्रमुख थे,
इनकी पत्नी -यशोधरा   राजा सुप्पबुद्ध  या दंडपाणि शाक्य की पुत्री थी,
संभवतः सर्वप्रथम बुद्ध
विष्णु के 9 वें अवतार के रूप में प्रतिष्टित -भगवन बुद्ध
इनकी माता -अंजना
पिता-हेम्सदन
जन्म स्थल -गया(बिहार)
श्री मद्भागवत पुराण और नरसिंह पुराण के अनुसार भगवन बुद्ध लगभग 3000 बी.सी. इस धरती पर आये थे,
विद्वानों का एक समुदाय वैदिक काल को करीब 2000 बी.सी. आर्यो के आगमन से मानता है, परंतु कई उत्खननों के आधार पर कई विद्वान् जैसे डेविड फ्राले, बी बी लाल, एस आर राव, सुभाष काक और अरविंदो
वैदिक सभ्यता की शुरुवात भारत में 3000 से 4000 बी.सी. तक माना है, क्योकि आर्यो के बाहर से आने का कोई प्रमाण नही मिला है,
बाल गंगाधर तिलक जी ने भी वैदिक सभ्यता को करीब 6000 बी.सी. माना है
गौर करने वाली बात ये है कि
लिखित वर्णन के अनुसार बुद्ध (गौतम / भगवान) ने
गुरु विश्वामित्र से वेद, उपनिषद, राजधर्म, और युद्ध की शिक्षा ली थी,
और ये गुरु विश्वामित्र ऋग्वेद के अनुसार राजा गाधि के पुत्र एक कुशल नरेश थे जिन्हें बाद में राजऋषि की उपाधि मिली थी , ये गुरु वशिष्ठ और श्री राम के समकालीन थे , ये गायत्री मंत्र( सूर्य स्तुति) के ज्ञाता थे,
इस तरह इनका समय 3000 बी.सी. (ऋग्वैदिक काल) माना जा सकता है
और यही काल श्रीमद भागवत और नरसिंह पुराण के अनुसार भगवान बुद्ध का समय है,
और एक गौर करने वाली बात यह है कि
बौद्ध धर्म के महायान के धर्मग्रंथ 'ललित विस्तार सूत्र' के 21 वें अध्याय के 178 वें पृष्ठ पर वर्णित है कि
" यह मात्र एक संयोग है कि गौतम बुद्ध ने उसी स्थान पर तपस्या की जिस स्थान पर भगवान बुद्ध ने तपस्या की लीला की थी,
सन 1807 में रामपुर में प्रकाशित अमरकोश में H.T. क्लब्रूक ने भी गौतम बुद्ध और महात्मा बुद्ध को अलग अलग बताया है,
बुद्ध एक पदवी है जिसे कोई भी मनुष्य अपने कर्मो से प्राप्त कर सकता है
एक और ज्ञान की बात
बौद्ध ग्रन्थ जातक कथा में वर्णित अगले भावी बुद्ध
"मैत्रेय"है

22 दिसंबर 2016

तो फिर असफल होगी यह योजना - काला-धन उजागर

अभी तो यह भविष्य के गर्भ में है  की काला धन ख़त्म करने की योजना कारगर हुई या नही, किन्तु अभी यह योजना “पूरा देखिये जात, आधा लीजिए बाँट” को चरितार्थ कर रही है और digidhan की तरफ मुड चुकी है |इससे पहले भी कई बार काला-धन उजागर करने की योजनायें आई किन्तु सभी संभावना से कम ही सफल हुई है इसका कारण था भय बिनु होई न प्रीति, किन्तु अभी तो भय भरपूर है, नोट बंदी का भय, लाईनों में लगने का भय बैंकिंग अधिकारीयों के प्रश्नों का भय | परन्तु राजनितिक पार्टियों को नोट बदलने की खुली छूट देने की गलती(भले ही वह विधिमान्य हो) असहनीय है क्योंकि खुद प्रधानमंत्री के द्वारा लोगों को यह विश्वास दिला दिया गया था की नोट बंदी से राजनितिक-कालाधन भी बाहर आएगा | क्योंकि सभी को पता है की राजनितिक-कालाधन, अभी तक प्राप्त कालेधन से कई गुना ज्यादा है | यदि सरकार की इच्छाशक्ति हो तो एक अध्यादेश राजनितिक पार्टियों पर भी लाया जा सकता है(जो की शायद असम्भव ही है) | और तो और  कालाधन को सफ़ेद करनें में बैंकिंग अधिकारियों की संलिप्तता भी इन योजनाओं के नाकामी का प्रमुख कारण होगी|

19 दिसंबर 2016

साइबर सुरक्षा- 2nd- ऑनलाइन हैकिंग से कैसे बचाएं अपनी मेहनत की कमाई?

साइबर सुरक्षा त्रय की 2nd कड़ी 

ऑनलाइन हैकिंग से कैसे बचाएं अपनी मेहनत की कमाई?

1-       सबसे पहले आप अपने फेसबुक ट्विटर या इस तरह की सोशल साइट्स से अपनी डेट ऑफ़ बर्थ (जन्म दिन ) या तो छुपा दे या बदल दे,
2-      दूसरा काम आपको ये करना होगा की अपने बैंकिंग में प्रयोग होने वाले न० से कोई सोशल साईट न चलाये,
3-      अगर आपके पास BSNL का न० है तो उसे अपने बैंकिंग प्रयोग में प्राथमिकता दे, क्युकी BSNL की डुप्लीकेट सिम निकालना सरल नही है,
4-      बैंक में प्रयोग होने वाला EMAIL-ID से कोई और काम न करे किसी को भी मेल या किसी का मेल रीड करना ( बैंक मेल छोड़कर).
5-      एक A/C की मानसिकता से बाहर निकले और 2-3 अलग अलग बैंकों में 4-5 अकाउंट  में अपनी जमापूंजी बांट के रखे , जिससे अगर किसी बैंक में साइबर जालसाजी की समस्या आती है तो आपकी कमाई एक साथ न चली जाये ,, इसलिए धन को बाँट के रखे,
6-      बड़ी लिमिट वाले एक-दो  क्रेडिट कार्ड के बदले में आप छोटी लिमिट के 4-5 क्रेडिट कार्ड यूज़ करे, क्रेडिट कार्ड की लिमिट कम हो भले ही क्रेडिट कार्ड ज्यादा हो/
7-       ATM प्रयोग करते समय सावधानी बरतें.
8-      ATM पिन और OTP के लिए विशेष सावधानी बरते.
9-      फ़ोन कॉल ,whatsapp, मैसेज, या फेसबुक पर अपना ATM पिन / OTP कभी किसी को भी न बताये भले ही आप उसे जानते हो, क्युकी एयर-फ़ोन-टैपिंग के जरिये आपका पिन किसी और को भी मिल सकता है,,
10-   अगर बताना बहुत ज्यादा जरुरी हो तो, तत्काल पिन बदलने की व्यवस्था रखें, जैसे उसे पिन तब बताये जब वो एटीएम केबिन में हो और उससे बोल दे पिन तुरंत बदल दो और कार्ड वापिस करते समय बता देना,
11-     ऑनलाइन बैंकिंग का यूज़ पर्सनल कंप्यूटर पर करे, और खुद के IP से ही करे ( VPN का यूज़ करके अगर ip address छुपा के न करें)
12-    बिना टिकट ख़रीदे आप लाटरी नही जित सकते है ,इसका ध्यान रखें,
13-    बैंक पासबुक की zerox का प्रयोग डॉक्यूमेंट के रूप में जहा तक हो सके न करे,
14-   अपने आधार ,पैन, वोटर  कार्ड की zerox कही पर छोड़े नहीं, न ही किसी अनजान को दिखाए,
15-    सिम कार्ड, सिम के ऑफिस (जैसे आईडिया-पॉइंट, बीएसएनएल-ऑफिस, एयरटेल पॉइंट) से ही ख़रीदे, यहाँ पर आपके आईडी का मिस-यूज होने के चांस कम होते है.
16-   मोबाइल के एप्प को कस्टमाइज करे और उसे अपने कॉल, मैसेज, कांटेक्ट, को रीड करने वाले आप्शन को बंद कर दे, (ये एंड्राइड मर्शमैलो में आप्शन है)
फिर भी अगर आप साइबर जालसाजी का शिकार हो जाते है तो क्या करें ??

16 दिसंबर 2016

साइबर सुरक्षा -1st- साइबर फ्रॉड से बैंको में कितनी असुरक्षित है हमारी मेहनत की कमाई ?

साइबर सुरक्षा की 1st कड़ी  

साइबर फ्रॉड से बैंको में कितनी असुरक्षित है हमारी मेहनत की कमाई ?


साफ़ सुथरी अर्थव्यवस्था और बेहतर जीडीपी के लिए हम भारतियों ने डिजिटल भुकतान को अपनाने में कोई कोताही नहीं बरती है/
पर क्या जिस रफ़्तार से लोग डिजिटल भुकतान अपना रहे है या अपनाने को मजबूर हो रहे है,उसी रफ़्तार से सरकार उन पेमेंट सिस्टम की सुरक्षा के इंतजाम कर रही है या नहीं?
इसका जबाब सीधा और बहुत डरावना है, “नहीं” बिलकुल भी नहीं,
हमारी पुलिस या हमारी साइबर सुरक्षा प्रणाली के पास वो ताकत या यूँ कहिये ढांचा ही नहीं है की साइबर फ्रॉड से गए पैसों को वापिस दिला सके, ये तो ये भी नही बता सकते की किसने चुराए है/
  • ·         यु०एस० का जेपी मॉर्गन बैंक साइबर सिक्यूरिटी पर सालाना $ 300 मिलियन, करीब 2000 करोड़ रुपए खर्च करता है, इसके बावजूद वो सन 2014 में हैकिंग का शिकार हो गया था/

क्या भारत में कोई बैंक साइबर सुरक्षा पर इतना खर्च कर सकता है?
  • ·         दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन चोरी मार्च 2106 बांग्लादेश के सेन्ट्रल बैंक से हुई 81 मिलियन डॉलर की रकम हैक की गयी,आज तक यह रकम  पूरी तरह वापस नही आ पाई है/

बैंक अपना पैसा हैकरों से वापस नहीं ला सकता/ क्योंकि इन ऑनलाइन लुटेरों को पकड़ना आसान नहीं होता/
  • ·         अभी 4 दिसम्बर 2016 में रूस की सेंट्रल बैंक से हैकरों ने 2 अरब रूबल मतलब 2 अरब 11 लाख रुपये की चोरी की/
  • ·         अक्टूबर 2016 में भारत के 32 लाख डेबिट कार्ड की गुप्त जानकारी चोरी की गयी ,      NPCI के अनुसार 641 बैंक ग्राहकों के करीब 1 करोड़ 30लाख की रकम लूटी गयी/                         भारत में पिछले 5 सालों में 27 PSU बैंको से करीब 30 हज़ार करोड़ का साइबर फ्राड हुआ है/


कितनी असुरक्षित है हमारी मेहनत की कमाई, और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वालों के हालत क्या है वो देखिये-


  • ·         एटीएम अपग्रेड करने की जिम्मेदारी बैंको की होती है, पर आज भी 75% ATM बेहद असुरक्षित  आउटडेटिड विन्डोस xp पर चल रहे है/ इन्हें हैकर आसानी से हैक कर सकते है/
  • ·        भारत की इकलौती साइबर कोर्ट “साइबर अपीलेट ट्रिब्यूनल” (कनाटप्लेस-डेल्ही इसकी बिल्डिंग का किराया करीब 30लाख रुपये/माह है) में 30-जून-2011 से किसी जज की नियुक्ति ही नहीं हुयी है, जिससे इस न्यायालय में कोई जजमेंट नहीं दिया गया,

सभी राज्यों के हाई-कोर्ट में गए साइबर मामले यहीं पर ट्रान्सफर कर दिए जाते है और फिर भुक्तभोगी को सिर्फ तारिख मिलती है,
  • ·         BCSBI के गाइडलाइन्स के मुताबिक बैंक और ग्राहक दोनों की गलती ना होने पर साइबर फ्रॉड में बैंक एक बार 5000 रुपये की भरपाई करेगा, (सिर्फ एक बार 5000 रूपये)
  • ·         राज्यों में पुलिस के पास साइबर फ्रॉड की जानकारी का नितांत आभाव है, इन्हें खुद ही नहीं पता होता की क्या करना चाहिए/
  • ·         बैंको के बीच भी तालमेल ठीक नहीं है, किसी दूसरे बैंक के ATM से गड़बड़ी होने पर ग्राहक दो बैंकों के बीच चक्कर काटता रहता है/
  • ·         भारत में “डाटा प्राइवेसी रेगुलेशन” नहीं है/
  • ·         बैंकों के लिए रेगुलेशन RBI है, परन्तु थर्ड पार्टी इ-वालेट एप्प के लिए कोई रेगुलेशन नहीं है, इ-वालेट से गड़बड़ी की शिकायत उपभोक्ता अदालत में की जा सकती है,
  • ·         इ-वालेट मुख्यतः मोबाइल न० पर चलते है, “सिम एक्सचेंज फ्रॉड” जिसमे सिम आपके पास रहेगा लेकिन न० को किसी दूसरे सिम पर एक्सचेंज करके आपका इ-बटुवा खाली किया जा सकता है, और ये काफी आसान भी है,

इस तरह से देखा जाये तो भारत में साइबर सुरक्षा का ढांचा बहुत कमजोर और अंधकारमय है/
“सिर्फ इमारत बनायीं जा रही है नीव की तरफ कोई ध्यान नही है” 

चाहे वो एक शिक्षित शहरी हो या गाँव का एक अनपढ़ किसान कोई भी अगर साइबर फ्रॉड का शिकार बनता है तो उसके रुपये वापस मिलने के चांसेस न के बराबर होते है,

इन फ्रॉड से बचने के लिए कुछ पॉइंट.....
साइबर सुरक्षा की 2nd कड़ी में 

ऑनलाइन हैकिंग से कैसे बचाएं अपनी मेहनत की कमाई?

                                                   अगले ब्लॉग में........

14 दिसंबर 2016

इन्टरनेट, डिजिटल इंडिया को तूफ़ान, शार्क और जहाज़ों से ख़तरा है| कैसे ?


शायद आपने भी ग़ौर किया होगा कि दो-तीन दिन से इंटरनेट धोखा दे रहा है. या तो कनेक्शन नहीं मिलता, या फिर उसकी रफ़्तार बेहद धीमी है.
नोटबंदी के इस दौर में डिजिटल लेन-देन की ज़रूरत है और लंबी क़तारों से बचने के लिए इंटरनेट बड़ा सहारा साबित हो सकता है. ऐसे में चेन्नई के वरदा तूफ़ान ने देश के कई हिस्सों में ये सहारा छीन लिया है.
एयरटेल और वोडाफ़ोन जैसी मोबाइल नेटवर्क कंपनियों ने मैसेज के ज़रिए अपने ग्राहकों को बताया कि तूफ़ान ने अंडरसी (समुद्र में) केबल को नुकसान पहुंचाया है, जिसके चलते कनेक्शन में दिक्कतें पेश आ सकती हैं.
सवाल उठना लाज़मी है कि इस तूफ़ान और हमारे इंटरनेट का क्या लेना-देना? दरअसल, इंटरनेट की दुनिया समंदर ने नीचे बिछी केबल से चलती है और अगर ये केबल प्रभावित होती हैं, तो इंटरनेट कनेक्शन में परेशानी आनी तय है.
टेलीकम्युनिकेशन मार्केट रिसर्च फ़र्म टेलीज्यॉग्रफ़ी के मुताबिक दुनिया भर में समंदर के नीचे फ़िलहाल 321 केबल सिस्टम काम कर डिजिटल इंडिया को तूफ़ान, शार्क और जहाज़ों से है ख़तरारहे हैं. इनमें कुछ निर्माणाधीन हैं और इनकी संख्या साल दर साल बढ़ रही है.
आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि साल 2006 में जहां सबमरीन केबल के हिस्से सिर्फ़ एक फ़ीसदी ट्रैफ़िक था, वहीं अब 99 फ़ीसदी अंतरराष्ट्रीय डाटा इन्हीं तारों से दौड़ता है.

केबल तारों को किन चीज़ों से ख़तरा?

इन केबल का इतिहास पुराना है. 1850 के दशक में बिछाई गई पहली सबमरीन कम्युनिकेशन केबल टेलीग्राफ़िक ट्रैफ़िक के लिए इस्तेमाल होती थी जबकि आधुनिक केबल, डिजिटल डाटा के लिए ऑप्टिकल फ़ाइबर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है. इनमें टेलीफ़ोन, इंटरनेट और प्राइवेट डाटा ट्रैफ़िक शामिल है.
आधुनिक केबल की बात करें, तो इनकी मोटाई क़रीब 25 मिलीमीटर और वज़न 1.4 किलोग्राम प्रति मीटर होता है. किनारे पर छिछले पानी के लिए ज़्यादा मोटाई वाली केबल इस्तेमाल होती है. अंटार्कटिका को छोड़कर सारे महाद्वीप इन केबल से जुड़े हैं.
लंबाई की बात करें, तो ये लाखों किलोमीटर में है और इनकी गहराई कई मीटर है. दुनिया कम्युनिकेशन, ख़ास तौर से इंटरनेट के मामले में इन केबल पर निर्भर करती है और इन तारों को नुकसान पहुंचने के कई कारण हो सकते हैं.

जापान ने पेश की थी मिसाल

चेन्नई के तूफ़ान जैसे कुदरती हादसे तो अपनी जगह हैं, लेकिन अतीत में शार्क मछलियों से लेकर समुद्र में निर्माण संबंधी उपकरण और जहाज़ों के लंगर भी इन तारों के लिए ख़तरा पैदा कर चुके हैं.
इन ख़तरों के बावजूद सबमरीन केबल, सैटेलाइट इस्तेमाल करने की तुलना में कहीं ज़्यादा सस्ती हैं. ये सही है कि सैटेलाइट के ज़रिए दूर-दराज़ के इलाकों तक पहुंचा जा सकता है, लेकिन दुनिया भर के देश अब नए फ़ाइबर-ऑप्टिक केबल बिछाने में निवेश कर रहे हैं.
मौजूदा केबल नेटवर्क को मज़बूत बनाने के लिए बैकअप के लिए केबल भी बिछाई जा रही हैं. साल 2011 में जापान में आई सुनामी ने केबल तारों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था, लेकिन मज़बूत बैकअप के बूते वो ऑनलाइन रहने में कामयाब रहा.

चेन्नई और मुंबई बेहद अहम

अब बात करें भारत की. सबमरीन केबल नेटवर्क के मुताबिक़ देश में 10 सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशन हैं, जिनमें से चार मुंबई, तीन चेन्नई, एक कोच्चि, एक तुतीकोरिन और एक दिघा में है.
इनमें अगर भारत के दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट गेटवे की बात करें, तो इस लिहाज़ से मुंबई और चेन्नई काफ़ी अहम हैं. और चेन्नई के तूफ़ान ने समंदर में ऑप्टिक फ़ाइबर को नुकसान पहुंचाकर साउदर्न इंडियन गेटवे को प्रभावित किया है.

कई अहम तारों से जुड़ी चेन्नई

सबमरीन केबल मैप के अनुसार अलग जगहों से अलग अलग फ़ासले का केबल नेटवर्क जुड़ा है.
चेन्नई बे ऑफ़ बंगाल गेटवे (8,100 किलोमीटर), सीमीवी-4 (20 हज़ार किलोमीटर), टाटा टीजीएन-टाटा इंडिकॉम (3175 किलोमीटर) और आई2आई केबल नेटवर्क (3200 किलोमीटर) जैसे केबल नेटवर्क से जुड़ा है. ये नेटवर्क उसे यूरोप और दक्षिण एशिया से जोड़ते हैं.
इसके अलावा मुंबई को जोड़ने वाले अहम केबल नेटवर्क का नाम है यूरोपा इंडिया गेटवे, जिसकी लंबाई क़रीब 15 हज़ार किलोमीटर है.
मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के मुताबिक उनके इंजीनियर केबल में आई ख़ामियों को दूर करने की कोशिश में जुटे हैं और जल्द ही इस समस्या को दूर कर दिया जाएगा.

लेकिन जब तक वरदा की चपेट में आई केबल ठीक नहीं होतीं, आपका इंटरनेट हौले-हौले ही चलेगा. साभार -बीबीसी 

12 दिसंबर 2016

महान लोगों की आलोचना क्यों जरुरी है

महान लोंगो के पीछे अनुकरण करने वालो का समूह होता है जिससे महान लोंगो की एक छोटी भूल भी कई लोंगो को पथ से भटका सकती है, भले ही यह भूल एक बहुत छोटी सी भूल हो तो भी उस भूल को भी बहुत बड़ी भूल ही कहा जायेगा /
फिर चाहे वो श्री राम हो श्री कृष्ण हो , बुद्ध , महाबीर, ईसा, मुहम्मद साहब या कोई भी हो ...........
महापुरुष सिर्फ पूजा के लिए नही होते है

महापुरुषो पर विचार न करेंगे तो उनका हमारे जीवन से स्पर्श ही नहीं रहेगा , विचार करेंगे तो आलोचना होगी,
और आलोचना में नए विचारो का सृजन होगा जो स्वयं और समाज को सही पथ पर ले जायेगा / .
विचार योग्य बात ये है की .... कही न कही हमसे कुछ गलतियां हो रही है जो हमारे देश की इस हालत की जिम्मेदार है /

भारतीय स्वतंत्र्योत्तर इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि " तीसरा आपातकाल 1975"

आपात काल अब तक तीन बार -1962, 1971,1975 में घोषित किये गए है,

·        अक्टूबर 1962- पहला राष्ट्रीय आपात काल(अनु० 352) - नेफ़ा नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी ( अरुणाचल प्रदेश का पुराना नाम ) में चीनी आक्रमण के कारण लागू किया गया और यह जनवरी 1968 तक जारी रहा ,
·        दिसंबर 1971- दूसरा आपातकाल पाकिस्तान के आक्रमण के कारण ,
   इसके लगे होने के साथ ही लोकतंत्र में मनमाना राज और आपातकालीन अधिकारों का दुरूपयोग करने वाले तीसरे आपातकाल की घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती गाँधी ने की
·        जून 1975 में - तीसरा आपातकाल (“आंतरिक अशांति” के कारण – {बाद में 44वें संशोधन के द्वारा इसके स्थान पर “सशस्त्र विद्रोह” शब्द रखा गया}  ) 


26 जून 1975 से 21 मार्च 1977  तक 21 महीने का यह  आपातकाल सम्पूर्ण लोकतंत्र पर एक जोरदार तमाचा था  जयप्रकाश नारायण ने इसे 'भारतीय इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि' कहा था।
इस आपातकाल में स्वर्णसिंह आयोग की सिफारिश से  1976 का 42वा संविधान संसोधन हुआ जिसमे संविधान में कुल 19 संशोधन किये गए , इसे मिनी संविधान की संज्ञा दी गयी ,
कुछ तथ्य
1.     तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी थी 
2.     स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक समय था। आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए थे और सभी नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया था। 
3.     इसकी जड़ में 1971 में हुए लोकसभा चुनाव का था, जिसमें उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी राजनारायण को पराजित किया था। लेकिन चुनाव परिणाम आने के चार साल बाद राज नारायण ने हाईकोर्ट में चुनाव परिणाम को चुनौती दी  2 जून, 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी का चुनाव निरस्त कर उन पर छह साल तक चुनाव न लड़ने का प्रतिबंध लगा दिया और उनके मुकाबले हारे राजनारायण सिंह को चुनाव में विजयी घोषित कर दिया था।   राजनारायण सिंह की दलील थी कि इन्दिरा गांधी ने चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया, तय सीमा से अधिक पैसा खर्च किया और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया। अदालत ने इन आरोपों को सही ठहराया था। इसके बावजूद श्रीमती गांधी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। तब कांग्रेस पार्टी ने भी बयान जारी कर कहा था कि इन्दिरा गांधी का नेतृत्व पार्टी के लिए अपरिहार्य है।  
4.     इन्दिरा गांधी ने अदालत के इस निर्णय को मानने से इनकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की घोषणा की और 26 जून को आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी गई।
5.     इंदिरा गांधी ने अपने प्रतिद्वंदियों को अलग कर दिया जिस कारण कांग्रेस दो भागों में विभाजित हो गयी, कांग्रेस (O)सिंडीकेट व कांग्रेस (R) जो इंदिरा की ओर थी, भागों में बट गयी।
6.      प्रधानमंत्री के बेटे संजय गांधी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर नसबंदी अभियान चलाया गया
7.     इस दौरान जनता के सभी मौलिक अधिकारों को स्थगित कर दिया गया था। सरकार विरोधी भाषणों और किसी भी प्रकार के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
8.        समाचार पत्रों को एक विशेष आचार संहिता का पालन करने के लिए विवश किया गया, जिसके तहत प्रकाशन के पूर्व सभी समाचारों और लेखों को सरकारी सेंसर से गुजरना पड़ता था। अर्थात तत्कालीन मीडिया पर भी अंकुश लगा दिया गया
9.     आपातकाल की घोषणा के साथ ही सभी विरोधी दलों के नेताओं को गिरफ्तार करवाकर अज्ञात स्थानों पर रखा गया। सरकार ने मीसा (मैंटीनेन्स ऑफ इंटरनल सिक्यूरिटी एक्ट) के तहत कदम उठाया ,यह ऐसा कानून था जिसके तहत गिरफ्तार व्यक्ति को कोर्ट में पेश करने और जमानत मांगने का भी अधिकार नहीं था   
10. कांग्रेस के कुशासन और भ्रष्टाचार से तंग जनता में इंदिरा सरकार इतनी अलोकप्रिय हो चुकी थी कि चारों ओर से उन पर सत्ता छोड़ने का दबाव था, लेकिन सरकार ने इस जनमानस को दबाने के लिए तानाशाही का रास्ता चुना /
11. उस समय बिहार में जयप्रकाश नारायण का आंदोलन अपने चरम पर था, 25 जून, 1975 को दिल्ली में हुई विराट रैली में जय प्रकाश नारायण ने पुलिस और सेना के जवानों से आग्रह किया कि शासकों के असंवैधानिक आदेश न मानें।
12. आपातकाल लागू करने के लगभग दो साल बाद विरोध की लहर तेज होती देख इंदिरा गांधी ने लोकसभा भंग कर 1977 में चुनाव कराने की सिफारिश कर दी। चुनाव में आपातकाल लागू करने का फैसला कांग्रेस के लिए घातक साबित हुआ। खुद इंदिरा गांधी अपने गढ़ रायबरेली से चुनाव हार गईं।
13.  जनता पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। संसद में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 350 से घटकर 153 पर सिमट गई और 30 वर्षों के बाद केंद्र में किसी ग़ैर कांग्रेसी सरकार का का गठन हुआ।   
14. नई सरकार ने आपातकाल के दौरान लिए गए फैसलों की जांच के लिए शाह आयोग गठित किया।
15.  43वा और 44वा संविधान संशोधन 42वें संशोधन के कुछ मामले रद्द करने के संदर्भ में है , जनता पार्टी ने अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में संविधान में ऐसे प्रावधान कर दिए जिससे देश में फिर इस तरह का आपातकाल न लग सके |  



11 दिसंबर 2016

नेताओं के नाम एक खुली चिट्ठी

माननीयों नमस्कार 
आशा है कुशल पूर्वक होंगे, और हमारी आशा है की आप संसद से हमारी कुशलता की कामना के लिए शीतकालीन सत्र में व्यस्त हों.
पर लोकसभा और राज्यसभा टीवी चैनलों से आते हुए समाचार मन में एक बड़ा सा प्रश्नचिन्ह लगा देते है ...
इंग्लिश डिक्शनरी में एक शब्द है MATRIOTISM जिसे हिंदी में एक शब्द द्वारा समझा जा सकता है मातृभूमि से प्रेम भावना| परन्तु हमारे द्वारा चुने गए हमारे तथाकथित प्रतिनिधि आप सब (मैंने तथाकथित शब्द का प्रयोग बिलकुल सही और कुछ लोगो के लिए ही किया है) किस तरह के MATRIOTISM का परिचय दे रहे है मेरी समझ के बिलकुल बाहर है| संसद जिससे पूरा देश चलता है आज वो खुद ही चलने को मोहताज़ है |( स्पष्ट कर दूं मेरा लगाव किसी पार्टी विशेष के प्रति नहीं है|) यह सत्य है की लोकतंत्र में विरोध होना बहुत जरुरी है , परन्तु वो विरोध स्वस्थ मानसिकता से किया जाना चाहिए न की स्वार्थ भरी मानसिकता से , विपक्ष को हक है विरोध करने का| जो आज सप्रंग कर रही है यही और इसी तरह कभी राजग भी करती थी परन्तु इसमें नुकसान तो पुरे देश का है | जिन्होंने संकुचित मानसिकता के लोगो को चुन के भेजा उनके साथ साथ नुकसान उनका भी है जिन्होंने विस्तृत मानसिकता वालों को संसद में भेजा है|
मेरा करबध्द निवेदन आप सभी नेताओं से है की आप संसद में स्वस्थ वातावरण बनाईये विपक्ष प्रश्न करे सरकार उसका उत्तर दे और वो उत्तर से संतुष्ट न हो तो दुबारा प्रश्न करे और सरकार उनको संतुष्ट करे, और जो भी संसद को शांतिपूर्ण चलने में सहयोग न करे उनको संसद के बाहर करवा दे |
आप की महती कृपा इस देश के ऊपर होगी की आप देशहित में संसद में एक स्वस्थ बहस करे और विकास के पथ पर चले,
धन्यवाद

प्रेषक -आपको वोट दे कर आपको जिताने वाला 
एक झल्लाया हुआ मतदाता

महगाई और काले धन से निपटने के लिए सोने पर सख्ती जरुरी, क्यूँ ?

महगाई और काले धन से निपटने के लिए सोने पर सख्ती जरुरी

महगाई-
प्राचीन काल से ही हम भारतियों का सोने के प्रति आकर्षण जगजाहिर है| औसतन 700 टन प्रतिवर्ष खपत के साथ हमारा भारत सोने की खपत में विश्व में प्रथम स्थान पर है, विश्व की खदानों से उत्पादित कुल सोने का करीब एक तिहाई स्वर्ण का उपभोग भारत करता है| शादी विवाह जैसी परंपरा में सोने की खूब खरीददारी की जाती है क्यूंकि भारतीय सोने को एक अच्छा निवेश मानते है, सोने का मूल्य महंगाई दर की अपेक्षा ज्यादा तेज़ी से बढ़ता है और यही वो कारण है जिससे हमें एहसास होता है की हमने सोना खरीदकर बुद्धिमानी दिखाई है, जहाँ तक वैक्तिक स्तर की बात हो तो सोना खरीदना फायदेमंद होता है परन्तु यदि राष्ट्रीय स्तर पर देखे तो देश के लिए सोने का अत्यधिक आयात मंहगाई का एक कारण है,
भारत में सोने उत्पादन ज्यादा नहीं होता इसलिए भारत विदेशों (स्विटज़रलैंड, यू०ए०इ० चीन,यू०एस०,ऑस्ट्रेलिया,द०अफ्रीका,रूस) से सोना आयात करता है/ भारत के आयात का करीब 12% भाग सोने का होता है जिसकी पेमेंट के लिए करीब 6000 करोड़ डॉलर की जरुरत होती है, जिसका नकारात्मक प्रभाव रुपये पर पड़ता है तथा देश में पेट्रोलियम उत्पादों के साथ अन्य वस्तुओं के मूल्य बढ़ने लगते है,
सोना अनुत्पादक किस्म की धातु है/ और भारत में अधिकतर सोना गहनों और निवेश के लिए ख़रीदा जाता है, जो सोना घरों, मंदिरों में, लाकरों में पड़ा हुआ रहता है वह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है इसलिए वर्तमान सरकार द्वारा लायी गयी 3 स्वर्ण योजनायें 1.मौद्रिकरण योजना, 2.सार्वभौम गोल्ड योजना, 3.भारतीय स्वर्ण सिक्का सोने की आयात को नियंत्रित करने और स्थिर स्वर्ण को चलन में लाने के लिए सराहनीय है/ सोने पर लगायी जाने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का मुख्य कारण आयात को नियत्रित करना ही है, परन्तु मूल्य बढने के साथ सोना और ज्यादा ध्यानाकर्षित करता है और हम भी बिना देश हित का विचार किये सोना खरीदते जाते है ,
इस पर रोक लगाने के लिए हाल ही में सरकार द्वारा उठाया गया कदम (जिसमे विवाहित महिला द्वारा 500ग्राम, अविवाहित महिला द्वारा 250ग्राम तथा पुरषों द्वारा 100ग्राम सोने के जेवर रखने की सीमा है) सराहनीय है,

काला धन-
सोने के लेन देन में प्रयुक्त होने वाले काले धन को रोकने की लिहाज से भी सोने की सीमा तय करने वाला यह कदम उत्तम कहा जा सकता है,   
आल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन के निदेशक अशोक मिनावाला ने कहा की “देश भर से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार रात सर्राफा कारोबार 200% पर पहुँच गया, औसतन उद्योग प्रतिदिन 2 टन का कारोबार करता है/ ”
नोट बंदी के बाद सोने की बिक्री में करीब 200% उछाल यह बताने के लिए पर्याप्त है की कही न कही काला धन सोने में खपाया जा रहा है/
सोने को सुरक्षित निवेश मान कर नोट बंदी के दिन करीब 4 टन की बिक्री हुई और इसमें करीब 3 टन की बिक्री रात 8 बजे के बाद हुई, इस दिन करीब 1600 करोड़ रूपये का कारोबार हुआ,
काला धन खपाने की बड़ी भूमिका  में सोने का असंगठित बाजार और नगद लेनदेन की प्रणाली जिम्मेदार है/ भारत में सोने का कारोबार लगभग 3 लाख करोड़ रूपए का है इसमें करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का असंगठित बाजार तथा 50 हजार करोड़ का संगठित बाजार है,
अब कारोबार में नगद लेनदेन की बात करें तो संगठित बाजार का करीब 40% और असंगठित बाज़ार का करीब 90% लेन-देन नगद में होता है, इस तरह स्वर्ण कारोबार में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का कारोबार नगदी मुद्रा में है जो की भारत में उपलब्ध कुल मुद्रा का लगभग 10% है/ और नकदी मुद्रा में काला धन होने की सम्भावना सर्वाधिक होती है,

अगर लोगो का आकर्षण गोल्ड की तरफ से हट कर ई-गोल्ड या अन्य निवेश योजनाओं की तरफ हो जाये तो स्थिति बेहतर हो सकती है/ सोने का आयात कम हो सकता है , सोने की इम्पोर्ट ड्यूटी नाम मात्र की हो सकती है, महगाई पर अभूतपूर्व लगाम लग सकती है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रुपये की वैल्यू बढ़ सकती है,