11 दिसंबर 2016

महगाई और काले धन से निपटने के लिए सोने पर सख्ती जरुरी, क्यूँ ?

महगाई और काले धन से निपटने के लिए सोने पर सख्ती जरुरी

महगाई-
प्राचीन काल से ही हम भारतियों का सोने के प्रति आकर्षण जगजाहिर है| औसतन 700 टन प्रतिवर्ष खपत के साथ हमारा भारत सोने की खपत में विश्व में प्रथम स्थान पर है, विश्व की खदानों से उत्पादित कुल सोने का करीब एक तिहाई स्वर्ण का उपभोग भारत करता है| शादी विवाह जैसी परंपरा में सोने की खूब खरीददारी की जाती है क्यूंकि भारतीय सोने को एक अच्छा निवेश मानते है, सोने का मूल्य महंगाई दर की अपेक्षा ज्यादा तेज़ी से बढ़ता है और यही वो कारण है जिससे हमें एहसास होता है की हमने सोना खरीदकर बुद्धिमानी दिखाई है, जहाँ तक वैक्तिक स्तर की बात हो तो सोना खरीदना फायदेमंद होता है परन्तु यदि राष्ट्रीय स्तर पर देखे तो देश के लिए सोने का अत्यधिक आयात मंहगाई का एक कारण है,
भारत में सोने उत्पादन ज्यादा नहीं होता इसलिए भारत विदेशों (स्विटज़रलैंड, यू०ए०इ० चीन,यू०एस०,ऑस्ट्रेलिया,द०अफ्रीका,रूस) से सोना आयात करता है/ भारत के आयात का करीब 12% भाग सोने का होता है जिसकी पेमेंट के लिए करीब 6000 करोड़ डॉलर की जरुरत होती है, जिसका नकारात्मक प्रभाव रुपये पर पड़ता है तथा देश में पेट्रोलियम उत्पादों के साथ अन्य वस्तुओं के मूल्य बढ़ने लगते है,
सोना अनुत्पादक किस्म की धातु है/ और भारत में अधिकतर सोना गहनों और निवेश के लिए ख़रीदा जाता है, जो सोना घरों, मंदिरों में, लाकरों में पड़ा हुआ रहता है वह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है इसलिए वर्तमान सरकार द्वारा लायी गयी 3 स्वर्ण योजनायें 1.मौद्रिकरण योजना, 2.सार्वभौम गोल्ड योजना, 3.भारतीय स्वर्ण सिक्का सोने की आयात को नियंत्रित करने और स्थिर स्वर्ण को चलन में लाने के लिए सराहनीय है/ सोने पर लगायी जाने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का मुख्य कारण आयात को नियत्रित करना ही है, परन्तु मूल्य बढने के साथ सोना और ज्यादा ध्यानाकर्षित करता है और हम भी बिना देश हित का विचार किये सोना खरीदते जाते है ,
इस पर रोक लगाने के लिए हाल ही में सरकार द्वारा उठाया गया कदम (जिसमे विवाहित महिला द्वारा 500ग्राम, अविवाहित महिला द्वारा 250ग्राम तथा पुरषों द्वारा 100ग्राम सोने के जेवर रखने की सीमा है) सराहनीय है,

काला धन-
सोने के लेन देन में प्रयुक्त होने वाले काले धन को रोकने की लिहाज से भी सोने की सीमा तय करने वाला यह कदम उत्तम कहा जा सकता है,   
आल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन के निदेशक अशोक मिनावाला ने कहा की “देश भर से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार रात सर्राफा कारोबार 200% पर पहुँच गया, औसतन उद्योग प्रतिदिन 2 टन का कारोबार करता है/ ”
नोट बंदी के बाद सोने की बिक्री में करीब 200% उछाल यह बताने के लिए पर्याप्त है की कही न कही काला धन सोने में खपाया जा रहा है/
सोने को सुरक्षित निवेश मान कर नोट बंदी के दिन करीब 4 टन की बिक्री हुई और इसमें करीब 3 टन की बिक्री रात 8 बजे के बाद हुई, इस दिन करीब 1600 करोड़ रूपये का कारोबार हुआ,
काला धन खपाने की बड़ी भूमिका  में सोने का असंगठित बाजार और नगद लेनदेन की प्रणाली जिम्मेदार है/ भारत में सोने का कारोबार लगभग 3 लाख करोड़ रूपए का है इसमें करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का असंगठित बाजार तथा 50 हजार करोड़ का संगठित बाजार है,
अब कारोबार में नगद लेनदेन की बात करें तो संगठित बाजार का करीब 40% और असंगठित बाज़ार का करीब 90% लेन-देन नगद में होता है, इस तरह स्वर्ण कारोबार में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का कारोबार नगदी मुद्रा में है जो की भारत में उपलब्ध कुल मुद्रा का लगभग 10% है/ और नकदी मुद्रा में काला धन होने की सम्भावना सर्वाधिक होती है,

अगर लोगो का आकर्षण गोल्ड की तरफ से हट कर ई-गोल्ड या अन्य निवेश योजनाओं की तरफ हो जाये तो स्थिति बेहतर हो सकती है/ सोने का आयात कम हो सकता है , सोने की इम्पोर्ट ड्यूटी नाम मात्र की हो सकती है, महगाई पर अभूतपूर्व लगाम लग सकती है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रुपये की वैल्यू बढ़ सकती है,

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