आपात काल अब तक तीन बार -1962, 1971,1975 में
घोषित किये गए है,
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अक्टूबर 1962- पहला
राष्ट्रीय आपात काल(अनु० 352) - नेफ़ा नार्थ ईस्ट
फ्रंटियर एजेंसी ( अरुणाचल
प्रदेश का पुराना नाम ) में चीनी आक्रमण के कारण लागू किया गया और यह जनवरी 1968 तक जारी
रहा ,
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दिसंबर 1971- दूसरा
आपातकाल पाकिस्तान के आक्रमण के कारण ,
इसके लगे होने के साथ ही लोकतंत्र में मनमाना राज और आपातकालीन अधिकारों का दुरूपयोग करने वाले तीसरे आपातकाल की घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती गाँधी ने की
इसके लगे होने के साथ ही लोकतंत्र में मनमाना राज और आपातकालीन अधिकारों का दुरूपयोग करने वाले तीसरे आपातकाल की घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती गाँधी ने की
·
जून 1975 में -
तीसरा आपातकाल (“आंतरिक अशांति” के कारण – {बाद में 44वें संशोधन के द्वारा इसके
स्थान पर “सशस्त्र विद्रोह” शब्द रखा गया} )
26 जून 1975 से 21
मार्च 1977 तक 21
महीने का यह आपातकाल सम्पूर्ण लोकतंत्र पर एक जोरदार तमाचा था , जयप्रकाश नारायण ने इसे 'भारतीय इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि' कहा था।
इस आपातकाल में स्वर्णसिंह आयोग की सिफारिश से 1976 का 42वा संविधान संसोधन हुआ
जिसमे संविधान में कुल 19 संशोधन
किये गए , इसे मिनी
संविधान की संज्ञा दी गयी ,
कुछ तथ्य
1. तत्कालीन
राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर
भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी थी
2.
स्वतंत्र भारत के इतिहास
में यह सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक समय था। आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए
थे और सभी नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया था।
3.
इसकी जड़ में 1971 में हुए
लोकसभा चुनाव का था, जिसमें
उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी राजनारायण को पराजित किया था। लेकिन चुनाव
परिणाम आने के चार साल बाद राज नारायण ने हाईकोर्ट में चुनाव परिणाम को चुनौती
दी 2 जून, 1975 को
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी का चुनाव
निरस्त कर उन पर छह साल तक चुनाव न लड़ने का प्रतिबंध लगा दिया और उनके मुकाबले
हारे राजनारायण सिंह को चुनाव में विजयी घोषित कर दिया था। राजनारायण सिंह की दलील थी कि इन्दिरा गांधी
ने चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया, तय सीमा
से अधिक पैसा खर्च किया और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए गलत तरीकों का
इस्तेमाल किया। अदालत ने इन आरोपों को सही ठहराया था। इसके बावजूद श्रीमती गांधी
ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। तब कांग्रेस पार्टी ने भी बयान जारी कर कहा था
कि इन्दिरा गांधी का नेतृत्व पार्टी के लिए अपरिहार्य है।
4.
इन्दिरा गांधी ने अदालत के
इस निर्णय को मानने से इनकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की घोषणा
की और 26 जून को आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी गई।
5.
इंदिरा गांधी ने अपने प्रतिद्वंदियों को
अलग कर दिया जिस कारण कांग्रेस दो भागों में विभाजित हो गयी, कांग्रेस (O)सिंडीकेट व
कांग्रेस (R) जो इंदिरा की ओर थी, भागों में बट गयी।
7. इस दौरान
जनता के सभी मौलिक अधिकारों को स्थगित कर दिया गया था। सरकार विरोधी भाषणों और
किसी भी प्रकार के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
8. समाचार
पत्रों को एक विशेष आचार संहिता का पालन करने के लिए विवश किया गया, जिसके तहत प्रकाशन के पूर्व सभी समाचारों और लेखों को सरकारी सेंसर
से गुजरना पड़ता था। अर्थात तत्कालीन मीडिया पर भी अंकुश लगा दिया गया
9.
आपातकाल की घोषणा के साथ ही
सभी विरोधी दलों के नेताओं को गिरफ्तार करवाकर अज्ञात स्थानों पर रखा गया। सरकार
ने मीसा (मैंटीनेन्स ऑफ इंटरनल सिक्यूरिटी एक्ट) के तहत कदम उठाया ,यह ऐसा कानून
था जिसके तहत गिरफ्तार व्यक्ति को कोर्ट में पेश करने और जमानत मांगने का भी
अधिकार नहीं था
10.
कांग्रेस के कुशासन और
भ्रष्टाचार से तंग जनता में इंदिरा सरकार इतनी अलोकप्रिय हो चुकी थी कि चारों ओर
से उन पर सत्ता छोड़ने का दबाव था, लेकिन सरकार ने इस जनमानस को दबाने के लिए तानाशाही का रास्ता चुना /
11.
उस समय बिहार में जयप्रकाश
नारायण का आंदोलन अपने चरम पर था, 25 जून, 1975 को
दिल्ली में हुई विराट रैली में जय प्रकाश नारायण ने पुलिस और सेना के जवानों से
आग्रह किया कि शासकों के असंवैधानिक आदेश न मानें।
12. आपातकाल
लागू करने के लगभग दो साल बाद विरोध की लहर तेज होती देख इंदिरा गांधी ने लोकसभा
भंग कर 1977 में चुनाव कराने की सिफारिश कर दी। चुनाव में आपातकाल लागू
करने का फैसला कांग्रेस के लिए घातक साबित हुआ। खुद इंदिरा गांधी अपने गढ़
रायबरेली से चुनाव हार गईं।
13. जनता पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई और
मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। संसद में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 350 से
घटकर 153 पर सिमट गई और 30 वर्षों के बाद केंद्र में किसी ग़ैर कांग्रेसी सरकार का का गठन हुआ।
14. नई सरकार
ने आपातकाल के दौरान लिए गए फैसलों की जांच के लिए शाह आयोग गठित किया।
15. 43वा और 44वा संविधान
संशोधन 42वें संशोधन के कुछ मामले रद्द करने के संदर्भ में है , जनता पार्टी ने
अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में संविधान में ऐसे प्रावधान कर दिए जिससे देश में फिर
इस तरह का आपातकाल न लग सके |
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