16 दिसंबर 2016

साइबर सुरक्षा -1st- साइबर फ्रॉड से बैंको में कितनी असुरक्षित है हमारी मेहनत की कमाई ?

साइबर सुरक्षा की 1st कड़ी  

साइबर फ्रॉड से बैंको में कितनी असुरक्षित है हमारी मेहनत की कमाई ?


साफ़ सुथरी अर्थव्यवस्था और बेहतर जीडीपी के लिए हम भारतियों ने डिजिटल भुकतान को अपनाने में कोई कोताही नहीं बरती है/
पर क्या जिस रफ़्तार से लोग डिजिटल भुकतान अपना रहे है या अपनाने को मजबूर हो रहे है,उसी रफ़्तार से सरकार उन पेमेंट सिस्टम की सुरक्षा के इंतजाम कर रही है या नहीं?
इसका जबाब सीधा और बहुत डरावना है, “नहीं” बिलकुल भी नहीं,
हमारी पुलिस या हमारी साइबर सुरक्षा प्रणाली के पास वो ताकत या यूँ कहिये ढांचा ही नहीं है की साइबर फ्रॉड से गए पैसों को वापिस दिला सके, ये तो ये भी नही बता सकते की किसने चुराए है/
  • ·         यु०एस० का जेपी मॉर्गन बैंक साइबर सिक्यूरिटी पर सालाना $ 300 मिलियन, करीब 2000 करोड़ रुपए खर्च करता है, इसके बावजूद वो सन 2014 में हैकिंग का शिकार हो गया था/

क्या भारत में कोई बैंक साइबर सुरक्षा पर इतना खर्च कर सकता है?
  • ·         दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन चोरी मार्च 2106 बांग्लादेश के सेन्ट्रल बैंक से हुई 81 मिलियन डॉलर की रकम हैक की गयी,आज तक यह रकम  पूरी तरह वापस नही आ पाई है/

बैंक अपना पैसा हैकरों से वापस नहीं ला सकता/ क्योंकि इन ऑनलाइन लुटेरों को पकड़ना आसान नहीं होता/
  • ·         अभी 4 दिसम्बर 2016 में रूस की सेंट्रल बैंक से हैकरों ने 2 अरब रूबल मतलब 2 अरब 11 लाख रुपये की चोरी की/
  • ·         अक्टूबर 2016 में भारत के 32 लाख डेबिट कार्ड की गुप्त जानकारी चोरी की गयी ,      NPCI के अनुसार 641 बैंक ग्राहकों के करीब 1 करोड़ 30लाख की रकम लूटी गयी/                         भारत में पिछले 5 सालों में 27 PSU बैंको से करीब 30 हज़ार करोड़ का साइबर फ्राड हुआ है/


कितनी असुरक्षित है हमारी मेहनत की कमाई, और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वालों के हालत क्या है वो देखिये-


  • ·         एटीएम अपग्रेड करने की जिम्मेदारी बैंको की होती है, पर आज भी 75% ATM बेहद असुरक्षित  आउटडेटिड विन्डोस xp पर चल रहे है/ इन्हें हैकर आसानी से हैक कर सकते है/
  • ·        भारत की इकलौती साइबर कोर्ट “साइबर अपीलेट ट्रिब्यूनल” (कनाटप्लेस-डेल्ही इसकी बिल्डिंग का किराया करीब 30लाख रुपये/माह है) में 30-जून-2011 से किसी जज की नियुक्ति ही नहीं हुयी है, जिससे इस न्यायालय में कोई जजमेंट नहीं दिया गया,

सभी राज्यों के हाई-कोर्ट में गए साइबर मामले यहीं पर ट्रान्सफर कर दिए जाते है और फिर भुक्तभोगी को सिर्फ तारिख मिलती है,
  • ·         BCSBI के गाइडलाइन्स के मुताबिक बैंक और ग्राहक दोनों की गलती ना होने पर साइबर फ्रॉड में बैंक एक बार 5000 रुपये की भरपाई करेगा, (सिर्फ एक बार 5000 रूपये)
  • ·         राज्यों में पुलिस के पास साइबर फ्रॉड की जानकारी का नितांत आभाव है, इन्हें खुद ही नहीं पता होता की क्या करना चाहिए/
  • ·         बैंको के बीच भी तालमेल ठीक नहीं है, किसी दूसरे बैंक के ATM से गड़बड़ी होने पर ग्राहक दो बैंकों के बीच चक्कर काटता रहता है/
  • ·         भारत में “डाटा प्राइवेसी रेगुलेशन” नहीं है/
  • ·         बैंकों के लिए रेगुलेशन RBI है, परन्तु थर्ड पार्टी इ-वालेट एप्प के लिए कोई रेगुलेशन नहीं है, इ-वालेट से गड़बड़ी की शिकायत उपभोक्ता अदालत में की जा सकती है,
  • ·         इ-वालेट मुख्यतः मोबाइल न० पर चलते है, “सिम एक्सचेंज फ्रॉड” जिसमे सिम आपके पास रहेगा लेकिन न० को किसी दूसरे सिम पर एक्सचेंज करके आपका इ-बटुवा खाली किया जा सकता है, और ये काफी आसान भी है,

इस तरह से देखा जाये तो भारत में साइबर सुरक्षा का ढांचा बहुत कमजोर और अंधकारमय है/
“सिर्फ इमारत बनायीं जा रही है नीव की तरफ कोई ध्यान नही है” 

चाहे वो एक शिक्षित शहरी हो या गाँव का एक अनपढ़ किसान कोई भी अगर साइबर फ्रॉड का शिकार बनता है तो उसके रुपये वापस मिलने के चांसेस न के बराबर होते है,

इन फ्रॉड से बचने के लिए कुछ पॉइंट.....
साइबर सुरक्षा की 2nd कड़ी में 

ऑनलाइन हैकिंग से कैसे बचाएं अपनी मेहनत की कमाई?

                                                   अगले ब्लॉग में........

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