बुद्ध , बौद्ध धर्म, और भगवन बुद्ध
(लेखन का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को आहत करना बिलकुल भी नही है , यह सिर्फ जनश्रुतियों और जातक कथाओं को समझने का प्रयत्न भर है )लोगो को सत्य अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले गौतम बुद्ध को मानने वाले भारत समेत दुनिया में करोड़ो लोग हैं,
परंतु आज एक नयी बात आपको बताते है कि भगवान बुद्ध जो विष्णु के 9 वें अवतार माने जाते है और गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) दो अलग व्यक्ति है,,
देखे कैसे-
जातक कथाओं के अनुसार अब तक गौतम बुद्ध से पूर्व 24 बुद्ध हो चुके है
जिनमे कुछ ज्ञात है
जैसे
18 वें फुस्स बुद्ध-
पिता-जयसेन, पत्नी- किसगोत्मा, 58 हाथ लंबे तथा 90 हज़ार वर्ष की अवस्था में सेताराम में परिनिर्वाण
19वें विपस्सी बुद्ध -
पिता- बंधुम, माता -बंधुमति
पत्नी-सुतना, पुत्र-सामवत्त संघ
80 हज़ार वर्ष की अवस्था में परिनिर्वाण
20 वें शिखि बुद्ध -
पिता -अरुणाव , माता- पभवति
जन्म -अरुणावती में , पत्नी- सब्बकामा, पुत्र-अतुल
70 हज़ार वर्ष के पश्चात दस्सराम में परिनिर्वाण
21वें वेसम्भू बुद्ध-
पिता- सुप्पतित्त , माता-यसवती
पत्नी - सुचित्रा, पुत्र- सुप्पबुद्ध
60 हज़ार वर्ष के पश्चात परिनिर्वाण
22 वे कुकसंध बुद्ध
पिता-अग्गिदत्त खेमावति
माता- विशाखा
खेमावन में जन्म
पत्नी- विरोचमना
पुत्र- उत्तर
23 वें कोनागमन बुद्ध
इनके छूप का वर्णन ह्वेनसांग तथा फाह्यान ने भी किया है ,
सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 20 वे वर्ष में कोनागमंन के जन्मस्थान पर बने छूप को दोगुना बढ़ किया था ,
24 कश्यप बुद्ध
इनका जन्म सारनाथ में हुआ था
इनके तीर्थो का वर्णन भी ह्वेनसंग ने किया है,
और अब आते है शाक्यमुनि अर्थात
25 वे बुद्ध- गौतम बुद्ध
बचपन का नाम -सिद्धार्थ
पिता-सुद्धोधन
माता-महमाया
जन्म 563 बी.सी. कपिलवस्तु लुम्बिनी के जंगलों में
पिता सुद्धोधन साक्यकुल के प्रमुख थे,
इनकी पत्नी -यशोधरा राजा सुप्पबुद्ध या दंडपाणि शाक्य की पुत्री थी,
संभवतः सर्वप्रथम बुद्ध
विष्णु के 9 वें अवतार के रूप में प्रतिष्टित -भगवन बुद्ध
इनकी माता -अंजना
पिता-हेम्सदन
जन्म स्थल -गया(बिहार)
श्री मद्भागवत पुराण और नरसिंह पुराण के अनुसार भगवन बुद्ध लगभग 3000 बी.सी. इस धरती पर आये थे,
विद्वानों का एक समुदाय वैदिक काल को करीब 2000 बी.सी. आर्यो के आगमन से मानता है, परंतु कई उत्खननों के आधार पर कई विद्वान् जैसे डेविड फ्राले, बी बी लाल, एस आर राव, सुभाष काक और अरविंदो
वैदिक सभ्यता की शुरुवात भारत में 3000 से 4000 बी.सी. तक माना है, क्योकि आर्यो के बाहर से आने का कोई प्रमाण नही मिला है,
बाल गंगाधर तिलक जी ने भी वैदिक सभ्यता को करीब 6000 बी.सी. माना है
गौर करने वाली बात ये है कि
लिखित वर्णन के अनुसार बुद्ध (गौतम / भगवान) ने
गुरु विश्वामित्र से वेद, उपनिषद, राजधर्म, और युद्ध की शिक्षा ली थी,
और ये गुरु विश्वामित्र ऋग्वेद के अनुसार राजा गाधि के पुत्र एक कुशल नरेश थे जिन्हें बाद में राजऋषि की उपाधि मिली थी , ये गुरु वशिष्ठ और श्री राम के समकालीन थे , ये गायत्री मंत्र( सूर्य स्तुति) के ज्ञाता थे,
इस तरह इनका समय 3000 बी.सी. (ऋग्वैदिक काल) माना जा सकता है
और यही काल श्रीमद भागवत और नरसिंह पुराण के अनुसार भगवान बुद्ध का समय है,
और एक गौर करने वाली बात यह है कि
बौद्ध धर्म के महायान के धर्मग्रंथ 'ललित विस्तार सूत्र' के 21 वें अध्याय के 178 वें पृष्ठ पर वर्णित है कि
" यह मात्र एक संयोग है कि गौतम बुद्ध ने उसी स्थान पर तपस्या की जिस स्थान पर भगवान बुद्ध ने तपस्या की लीला की थी,
सन 1807 में रामपुर में प्रकाशित अमरकोश में H.T. क्लब्रूक ने भी गौतम बुद्ध और महात्मा बुद्ध को अलग अलग बताया है,
बुद्ध एक पदवी है जिसे कोई भी मनुष्य अपने कर्मो से प्राप्त कर सकता है
एक और ज्ञान की बात
बौद्ध ग्रन्थ जातक कथा में वर्णित अगले भावी बुद्ध
"मैत्रेय"है
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