11 दिसंबर 2016

नेताओं के नाम एक खुली चिट्ठी

माननीयों नमस्कार 
आशा है कुशल पूर्वक होंगे, और हमारी आशा है की आप संसद से हमारी कुशलता की कामना के लिए शीतकालीन सत्र में व्यस्त हों.
पर लोकसभा और राज्यसभा टीवी चैनलों से आते हुए समाचार मन में एक बड़ा सा प्रश्नचिन्ह लगा देते है ...
इंग्लिश डिक्शनरी में एक शब्द है MATRIOTISM जिसे हिंदी में एक शब्द द्वारा समझा जा सकता है मातृभूमि से प्रेम भावना| परन्तु हमारे द्वारा चुने गए हमारे तथाकथित प्रतिनिधि आप सब (मैंने तथाकथित शब्द का प्रयोग बिलकुल सही और कुछ लोगो के लिए ही किया है) किस तरह के MATRIOTISM का परिचय दे रहे है मेरी समझ के बिलकुल बाहर है| संसद जिससे पूरा देश चलता है आज वो खुद ही चलने को मोहताज़ है |( स्पष्ट कर दूं मेरा लगाव किसी पार्टी विशेष के प्रति नहीं है|) यह सत्य है की लोकतंत्र में विरोध होना बहुत जरुरी है , परन्तु वो विरोध स्वस्थ मानसिकता से किया जाना चाहिए न की स्वार्थ भरी मानसिकता से , विपक्ष को हक है विरोध करने का| जो आज सप्रंग कर रही है यही और इसी तरह कभी राजग भी करती थी परन्तु इसमें नुकसान तो पुरे देश का है | जिन्होंने संकुचित मानसिकता के लोगो को चुन के भेजा उनके साथ साथ नुकसान उनका भी है जिन्होंने विस्तृत मानसिकता वालों को संसद में भेजा है|
मेरा करबध्द निवेदन आप सभी नेताओं से है की आप संसद में स्वस्थ वातावरण बनाईये विपक्ष प्रश्न करे सरकार उसका उत्तर दे और वो उत्तर से संतुष्ट न हो तो दुबारा प्रश्न करे और सरकार उनको संतुष्ट करे, और जो भी संसद को शांतिपूर्ण चलने में सहयोग न करे उनको संसद के बाहर करवा दे |
आप की महती कृपा इस देश के ऊपर होगी की आप देशहित में संसद में एक स्वस्थ बहस करे और विकास के पथ पर चले,
धन्यवाद

प्रेषक -आपको वोट दे कर आपको जिताने वाला 
एक झल्लाया हुआ मतदाता

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